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Khatu Shyam Mandir History in Hindi | खाटू श्याम जी की कहानी
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Khatu Shyam Mandir History in Hindi | खाटू श्याम जी की कहानी

खाटू श्याम जी मंदिर का इतिहास: बर्बरीक से 'हारे का सहारा' बनने की अद्भुत कहानी

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर (Khatu Shyam Mandir) भारत के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिरों में से एक है। हर साल लाखों भक्त यहाँ "हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा" के जयकारे लगाते हुए आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाटू श्याम जी असल में कौन हैं और उनका संबंध महाभारत काल से कैसे है? आइए जानते हैं बाबा श्याम का पूरा इतिहास।

1. कौन थे बर्बरीक? (महाभारत काल से जुड़ा इतिहास)

खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक था। वे महान पांडव वीर भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र थे। बचपन से ही बर्बरीक बहुत वीर और महान योद्धा थे। उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें तीन अचूक बाण (तीर) दिए थे। इसी कारण उन्हें 'तीन बाण धारी' भी कहा जाता है। ये तीन बाण पूरी सृष्टि को पल भर में नष्ट करने और बचाने की शक्ति रखते थे।

2. माता को दिया वचन: 'हारे का सहारा'

जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, तब बर्बरीक ने भी युद्ध में जाने की इच्छा जताई। युद्ध में जाने से पहले उनकी माता ने उनसे एक वचन लिया कि "तुम उसी पक्ष की तरफ से लड़ोगे जो पक्ष हार रहा होगा।" बर्बरीक ने अपनी माता को यह वचन दिया और नीले घोड़े पर सवार होकर कुरुक्षेत्र की ओर निकल पड़े।

3. श्री कृष्ण की परीक्षा और शीश का दान (शीश के दानी)

भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि अगर बर्बरीक ने हारते हुए पक्ष (कौरवों) का साथ दिया, तो पांडवों की हार निश्चित है। इसलिए कृष्ण जी ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और बर्बरीक का रास्ता रोक लिया।

कृष्ण जी ने बर्बरीक की शक्ति देखने के लिए उन्हें एक बाण से पीपल के पेड़ के सारे पत्तों को छेदने को कहा। बर्बरीक ने ऐसा कर दिखाया। तब श्री कृष्ण ने दान में बर्बरीक से उनका शीश (सिर) मांग लिया। एक क्षत्रिय होने के नाते बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश धड़ से अलग कर श्री कृष्ण को दान कर दिया। तभी से उन्हें 'शीश के दानी' कहा जाता है।

4. श्री कृष्ण का वरदान और 'श्याम' नाम

बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि "कलियुग में तुम मेरे 'श्याम' नाम से पूजे जाओगे। जो भी भक्त सच्चे मन से तुम्हारे दरबार में आएगा, तुम उसके सारे दुख दूर करोगे।" श्री कृष्ण ने बर्बरीक के शीश को एक ऊंचे स्थान पर रख दिया ताकि वे महाभारत का पूरा युद्ध देख सकें।

5. खाटू में शीश का प्रकट होना और मंदिर का निर्माण

महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश राजस्थान के खाटू गाँव की धरती में समा गया। कई सालों बाद, उस जगह पर एक गाय अपने आप दूध बहाने लगी। जब गाँव वालों ने वहां खुदाई की, तो उन्हें बाबा श्याम का चमत्कारी शीश मिला।

कहा जाता है कि खाटू के तत्कालीन राजा रूपसिंह चौहान को रात में सपना आया जिसमें बाबा ने उन्हें उस स्थान पर मंदिर बनाने का आदेश दिया। इसके बाद उस शीश को मंदिर में स्थापित किया गया, जिसे आज हम खाटू श्याम मंदिर के नाम से जानते हैं। वह पवित्र कुंड जहाँ शीश मिला था, उसे आज 'श्याम कुंड' कहा जाता है।

मंदिर की मुख्य विशेषताएँ और आकर्षण (Highlights)

  • फाल्गुन मेला: हर साल फाल्गुन महीने (होली के आस-पास) में खाटू श्याम जी का विशाल लक्खी मेला भरता है।
  • निशान यात्रा: भक्त रींगस से खाटू धाम तक पैदल चलकर बाबा को 'निशान' (ध्वज/झंडा) चढ़ाते हैं।
  • श्याम कुंड में स्नान: मान्यता है कि श्याम कुंड में स्नान करने से सभी रोग और पाप दूर हो जाते हैं।
  • हारे का सहारा: जो व्यक्ति जीवन में हर तरफ से निराश हो जाता है, बाबा श्याम उसकी नैया पार लगाते हैं।

दर्शन का स्थान: खाटू श्याम जी मंदिर, रिंगस के पास, जिला सीकर, राजस्थान।

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